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“धर्म की रक्षा के लिए एक संतान को बनाएं संन्यासी” — अष्टमी पर उज्जैन में गरजे अखाड़ा परिषद प्रमुख महंत रविंद्र पुरी महाराज, बोले- “सनातन की रक्षा के लिए बढ़ाएं संतों की संख्या”
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
अष्टमी के शुभ दिन उज्जैन की पावन धरती एक बार फिर धर्म के उद्घोष से गूंज उठी, जब अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी महाराज ने सनातन धर्म की सुरक्षा को लेकर एक ऐतिहासिक और विचारोत्तेजक संदेश दिया। महंतजी ने बड़ी दृढ़ता और धर्ममय स्वर में हिन्दू समाज से अपील की — “हर हिन्दू परिवार को कम से कम तीन से चार संतानें उत्पन्न करनी चाहिए, जिनमें से एक को संन्यास के पथ पर अग्रसर करना अनिवार्य है।”
दरअसल, पिछले तीन दिनों से उज्जैन में निवास कर रहे महंत रविंद्र पुरी महाराज निरंजनी अखाड़ा, बड़नगर रोड स्थित धार्मिक केंद्र में आयोजित कन्या पूजन और भंडारे के विशेष आयोजन में शामिल हुए थे। जहाँ बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु एकत्रित हुए, जहां उन्होंने संत महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया और प्रसादी ग्रहण की।
इस दौरान महंत रविंद्र पुरी महाराज ने चेतावनी देते हुए कहा कि वर्तमान में अधिकांश हिन्दू सिर्फ दो बच्चों पर ही रुक जाते हैं, जिससे आने वाले समय में धर्माचार्यों और संतों की संख्या में भारी गिरावट आ सकती है। “यदि संतों का मार्ग सूना होगा, तो धर्म की लौ कैसे जलेगी?” — यह सवाल महाराज ने समाज के सामने रखा।
महंतजी ने यह भी बताया कि देशभर से हजारों भक्त उन्हें फोन कर रहे हैं, जो अपने बच्चों को संत बनाना चाहते हैं। उन्होंने इसे “धर्म और राष्ट्र दोनों के हित में अति आवश्यक कर्तव्य” बताया। उन्होंने कहा, “संत वे दीप हैं जो युगों के अंधकार को आलोकित करते हैं, और यदि हम उन्हें अपने घरों से जन्म नहीं देंगे, तो अधर्म और अराजकता का अंधकार हमारे समाज को निगल जाएगा।”
सिर्फ धर्म ही नहीं, बल्कि राष्ट्र की राजनीति पर भी महाराज का स्वर निर्भीक और स्पष्ट रहा। बिहार की राजनीति पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि “तेजस्वी यादव भले ही मुख्यमंत्री बनने का स्वप्न देख रहे हों, लेकिन अब यह सपना कभी साकार नहीं होगा।” उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि “बिहार में अगली सरकार भारतीय जनता पार्टी की ही होगी।”
महाराज ने यह भी दावा किया कि लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की समस्याएं बढ़ने वाली हैं, क्योंकि चारा घोटाले जैसे पुराने मामलों की जांच दोबारा शुरू हो गई है। उन्होंने इसे “धर्म और न्याय की पुनरावृत्ति” बताते हुए कहा कि आने वाला समय लालू परिवार के लिए और भी कठिन साबित हो सकता है।